कुरआन को अल्लाह ने लगभग 1400 साल पहले नाज़िल फ़रमाया। उस दौर में न तो विज्ञान अपने उन्नत स्वरूप में था, न दूरबीन थी, न माइक्रोस्कोप और न आधुनिक अनुसंधान। लेकिन इसके बावजूद कुरआन में ऐसे अनेक वैज्ञानिक तथ्य मौजूद हैं, जिन्हें आज का विज्ञान बहुत बाद में खोज पाया।
यह चमत्कार कुरआन के अल्लाह की किताब होने का स्पष्ट संकेत देता है।
- भ्रूण (Embryo) के विकास का ज़िक्र
कुरआन में इंसान के माँ के पेट में विकसित होने की प्रक्रिया को अद्भुत अंदाज़ में बताया गया है:
“हमने इंसान को मिट्टी के निचोड़ से पैदा किया। फिर उसे नुत्फ़े (द्रव) की बूंद में बदलकर उसकी परख के लिए सुरक्षित जगह (गर्भाशय) में रखा। फिर हमने नुत्फ़े को अलक़ा (चिपकने वाला लोटस की तरह पदार्थ) में बदला…”
(कुरआन 23:12-14)
आज का एंब्रायोोलॉजी विज्ञान इस बात की पुष्टि करता है कि शुरू में भ्रूण गर्भाशय की दीवार से चिपका रहता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे कुरआन ने बताया।
- ब्रह्मांड का विस्तार (Expanding Universe)
20वीं सदी में एडविन हबल ने खोज की कि ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। यह अवधारणा कुरआन में पहले ही मौजूद थी:
“और हमने आसमान को शक्ति के साथ बनाया और हम ही उसे लगातार फैलाते जा रहे हैं।”
(कुरआन 51:47)
यह बात आधुनिक खगोल विज्ञान के सिद्धांतों से मेल खाती है।
- पर्वतों का कील की तरह होना
पहाड़ सिर्फ ऊपरी सतह पर नहीं होते, बल्कि ज़मीन के अंदर गहरी जड़ों की तरह धँसे होते हैं। भूगर्भ विज्ञान (Geology) इस तथ्य को मानता है।
कुरआन में:
“क्या हमने धरती को बिछौना और पहाड़ों को खूंटे (कील) जैसा नहीं बनाया?”
(कुरआन 78:6-7)
यह वर्णन एक वैज्ञानिक सच्चाई है।
- पानी में सब जीवों का निर्माण
विज्ञान यह मानता है कि जीवन की उत्पत्ति पानी से हुई।
कुरआन कहता है:
“और हमने हर जीव को पानी से पैदा किया।”
(कुरआन 21:30)
यह आज के बायोलॉजी के सिद्धांत का प्रमाण है।
- समुद्रों के बीच अदृश्य परदा
समुद्रों का पानी एक-दूसरे में मिलते हुए भी अपनी खारापन और तापमान की विशिष्टता बनाए रखता है। इसे Barrier Between Seas कहा जाता है।
कुरआन ने बताया:
“दो समुद्र हैं जो आपस में मिलते हैं, लेकिन उनके बीच एक रुकावट है, जिसे वे पार नहीं करते।”
(कुरआन 55:19-20)
यह सत्य बाद में समुद्री विज्ञान (Oceanography) द्वारा सिद्ध हुआ।
निष्कर्ष
कुरआन विज्ञान की किताब नहीं, लेकिन वह विज्ञान की ओर मार्गदर्शन करने वाली किताब अवश्य है।
जहाँ विज्ञान प्रयोगों से सत्य को खोजता है, वहीं कुरआन बिना प्रयोग बताए सत्य को घोषित करता है।
आज विज्ञान कुरआन के बताए हुए तथ्यों को एक-एक करके स्वीकार कर रहा है।
यह कुरआन के ईश्वरीय स्रोत होने का जीवित प्रमाण है।
